पुकारा है मैने तुझे, गहरे स्थानों से
पुकारा है मैने तुझे, गहरे स्थानों से,
है प्रभु मेरी तू सुनले, है प्रभु मेरी तू सुनले |
१. यदि तू ले अधर्मो का लेखा, कौन खड़ा रह सकता है |
लेकिन प्रभु तू क्षमा है करता, भय तेरा जिससे माना जाये।
२. जोहता हूँ बाट मैं तेरी, हर दिन के हर एक पहर में|
मेरी आशा है तुझसे जुडी, आशा है तेरे वचन में |
३. भोर को चाहते जितना पहरुए, उससे भी ज्यादा मैं चाहू तुम्हे |
अपने प्राणो से भी बढ़कर करता हूँ प्यार तुम्हें |


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